॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥
श्रीमद्भागवतमहापुराण
षष्ठ स्कन्ध – पहला अध्याय..(पोस्ट०९)
अजामिलोपाख्यानका प्रारम्भ
सूर्योऽग्निः खं मरुद्गावः सोमः सन्ध्याहनी दिशः ।
कं कुः स्वयं धर्म इति ह्येते दैह्यस्य साक्षिणः ॥ ४२ ॥
एतैरधर्मो विज्ञातः स्थानं दण्डस्य युज्यते ।
सर्वे कर्मानुरोधेन दण्डमर्हन्ति कारिणः ॥ ४३ ॥
सम्भवन्ति हि भद्राणि विपरीतानि चानघाः ।
कारिणां गुणसङ्गोऽस्ति देहवान् न ह्यकर्मकृत् ४४ ॥
येन यावान् यथाधर्मो धर्मो वेह समीहितः ।
स एव तत्फलं भुङ्क्ते तथा तावदमुत्र वै ॥ ४५ ॥
यथेह देवप्रवराः त्रैविध्यं उपलभ्यते ।
भूतेषु गुणवैचित्र्यात् तथान्यत्रानुमीयते ॥ ४६ ॥
वर्तमानोऽन्ययोः कालो गुणाभिज्ञापको यथा ।
एवं जन्मान्ययोरेतद् धर्माधर्मनिदर्शनम् ॥ ४७ ॥
मनसैव पुरे देवः पूर्वरूपं विपश्यति ।
अनुमीमांसतेऽपूर्वं मनसा भगवानजः ॥ ४८ ॥
(यमदूत कह रहे हैं) जीव शरीर अथवा मनोवृत्तियोंसे जितने कर्म करता है, उसके साक्षी रहते हैं—सूर्य, अग्नि, आकाश, वायु, इन्द्रियाँ, चन्द्रमा, सन्ध्या, रात, दिन, दिशाएँ, जल, पृथ्वी, काल और धर्म ॥४२॥ इनके द्वारा अधर्म का पता चल जाता है और तब दण्डके पात्रका निर्णय होता है। पाप कर्म करनेवाले सभी मनुष्य अपने-अपने कर्मोंके अनुसार दण्डनीय होते हैं ॥ ४३ ॥ निष्पाप पुरुषो ! जो प्राणी कर्म करते हैं, उनका गुणोंसे सम्बन्ध रहता ही है। इसीलिये सभीसे कुछ पाप और कुछ पुण्य होते ही हैं और देहवान् होकर कोई भी पुरुष कर्म किये बिना रह ही नहीं सकता ॥ ४४ ॥ इस लोकमें जो मुनष्य जिस प्रकारका और जितना अधर्म या धर्म करता है, वह परलोकमें उसका उतना और वैसा ही फल भोगता है ॥ ४५ ॥ देवशिरोमणियो ! सत्त्व, रज और तम—इन तीन गुणोंके भेदके कारण इस लोकमें भी तीन प्रकारके प्राणी दीख पड़ते हैं—पुण्यात्मा, पापात्मा और पुण्य-पाप दोनोंसे युक्त, अथवा सुखी, दुखी और सुख-दु:ख दोनोंसे युक्त; वैसे ही परलोकमें भी उनकी त्रिविधताका अनुमान किया जाता है ॥ ४६ ॥ वर्तमान समय ही भूत और भविष्यका अनुमान करा देता है। वैसे ही वर्तमान जन्मके पाप-पुण्य भी भूत और भविष्य-जन्मोंके पाप-पुण्यका अनुमान करा देते हैं ॥ ४७ ॥ हमारे स्वामी अजन्मा भगवान् सर्वज्ञ यमराज सबके अन्त:करणोंमें ही विराजमान हैं। इसलिये वे अपने मनसे ही सबके पूर्वरूपोंको देख लेते हैं। वे साथ ही उनके भावी स्वरूपका भी विचार कर लेते हैं ॥ ४८ ॥
शेष आगामी पोस्ट में --
🌹💟🥀ॐ श्रीपरमात्मने नमः
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नारायण नारायण नारायण नारायण