सोमवार, 15 मई 2023

जय जय अम्बे !

मत्समः पातकी नास्ति पापघ्नी त्वत्समा न हि।
एवं ज्ञात्वा महादेवि यथायोग्यं तथा कुरु॥

महादेवि ! मेरे समान कोई पातकी नहीं है और तुम्हारे समान दूसरी कोई पापहारिणी नहीं है ; ऐसा जानकर जो उचित जान पड़े , वह करो ॥


2 टिप्‍पणियां:

श्रीमद्भागवतमहापुराण पंचम स्कन्ध अठारहवां अध्याय..(पोस्ट०५)

॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ श्रीमद्भागवतमहापुराण  पंचम स्कन्ध – अठारहवाँ अध्याय..(पोस्ट०५) भिन्न-भिन्न वर्षोंका वर्णन स्त्रियो व्रतैस्त्वा हृष...