॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥
श्रीमद्भागवतमहापुराण
नवम स्कन्ध –दूसरा अध्याय..(पोस्ट०५)
पृषध्र, आदि मनु के पाँच पुत्रों का वंश
मरुत्तस्य दमः पुत्रः तस्यासीद् राज्यवर्धनः ।
सुधृतिस्तत्सुतो जज्ञे सौधृतेयो नरः सुतः ॥ २९ ॥
तत्सुतः केवलः तस्माद् बन्धुमान् वेगवान् ततः ।
बुधस्तस्याभवद् यस्य तृणबिन्दुर्महीपतिः ॥ ३० ॥
तं भेजेऽलम्बुषा देवी भजनीयगुणालयम् ।
वराप्सरा यतः पुत्राः कन्या च इडविडाभवत् ॥ ३१ ॥
यस्यां उत्पादयामास विश्रवा धनदं सुतम् ।
प्रादाय विद्यां परमां ऋषिर्योगेश्वरः पितुः ॥ ३२ ॥
विशालः शून्यबन्धुश्च धूम्रकेतुश्च तत्सुताः ।
विशालो वंशकृद् राजा वैशालीं निर्ममे पुरीम् ॥ ३३ ॥
हेमचन्द्रः सुतस्तस्य धूम्राक्षः तस्य चात्मजः ।
तत्पुत्रात् संयमादासीत् कृशाश्वः सहदेवजः ॥ ३४ ॥
कृशाश्वात् सोमदत्तोऽभूद् योऽश्वमेधैः इडस्पतिम् ।
इष्ट्वा पुरुषमापाग्र्यां गतिं योगेश्वराश्रिताम् ॥ ३५ ॥
सौमदत्तिस्तु सुमतिः तत्सुतो जनमेजयः ।
एते वैशालभूपालाः तृणबिन्दोर्यशोधराः ॥ ३६ ॥
मरुत्त के पुत्र का नाम था दम। दमसे राज्यवर्धन, उससे सुधृति और सुधृतिसे नर नामक पुत्रकी उत्पत्ति हुई ॥ २९ ॥ नरसे केवल, केवलसे बन्धुमान्, बन्धुमान् से वेगवान्, वेगवान् से बन्धु और बन्धुसे राजा तृणबिन्दुका जन्म हुआ ॥ ३० ॥ तृणबिन्दु आदर्श गुणोंके भण्डार थे। अप्सराओंमें श्रेष्ठ अलम्बुषा देवीने उनको वरण किया, जिससे उनके कई पुत्र और इडविडा नामकी एक कन्या उत्पन्न हुई ॥ ३१ ॥ मुनिवर विश्रवाने अपने योगेश्वर पिता पुलस्त्यजीसे उत्तम विद्या प्राप्त करके इडविडाके गर्भसे लोकपाल कुबेरको पुत्ररूपमें उत्पन्न किया ॥ ३२ ॥ महाराज तृणबिन्दुके अपनी धर्मपत्नीसे तीन पुत्र हुए—विशाल, शून्यबन्धु और धूम्रकेतु। उनमेंसे राजा विशाल वंशधर हुए और उन्होंने वैशाली नामकी नगरी बसायी ॥ ३३ ॥ विशालसे हेमचन्द्र, हेमचन्द्र से धूम्राक्ष, धूम्राक्ष से संयम और संयमसे दो पुत्र हुए—कृशाश्व और देवज ॥ ३४ ॥ कृशाश्व के पुत्रका नाम था सोमदत्त। उसने अश्वमेध यज्ञोंके द्वारा यज्ञपति भगवान् की आराधना की और योगेश्वर संतोंका आश्रय लेकर उत्तम गति प्राप्त की ॥ ३५ ॥ सोमदत्त का पुत्र हुआ सुमति और सुमतिसे जनमेजय। ये सब तृणबिन्दु की कीर्ति को बढ़ानेवाले विशालवंशी राजा हुए ॥ ३६ ॥
इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां
संहितायां नवमस्कन्धे द्वितीयोऽध्यायः ॥ २ ॥
हरिः ॐ तत्सत् श्रीकृष्णार्पणमस्तु ॥
शेष आगामी पोस्ट में --
गीताप्रेस,गोरखपुर द्वारा प्रकाशित श्रीमद्भागवतमहापुराण (विशिष्टसंस्करण) पुस्तककोड 1535 से
Jayshree Krishnà
जवाब देंहटाएंॐ नमो भगवते वासुदेवाय
जवाब देंहटाएंॐ नमो भगवते वासुदेवाय 🙏🌹🌺🙏
जवाब देंहटाएंजय श्री सीताराम
जवाब देंहटाएंओम नमो भगवते वासुदेवाय
जवाब देंहटाएंओम नमो नारायण 🙏🌹🙏
🌼🍂🌹जय श्री हरि: 🙏🙏
जवाब देंहटाएंॐ नमो भगवते वासुदेवाय
नारायण नारायण नारायण नारायण