शनिवार, 24 जनवरी 2026

श्रीमद्भागवतमहापुराण पंचम स्कन्ध बीसवां अध्याय..(पोस्ट०९)

॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥

श्रीमद्भागवतमहापुराण 
पंचम स्कन्ध – बीसवाँ अध्याय..(पोस्ट०९)

अन्य छ: द्वीपों तथा लोकालोक पर्वत का वर्णन

अण्डमध्यगतः सूर्यो द्यावाभूम्योर्यदन्तरम्
सूर्याण्डगोलयोर्मध्ये कोट्यः स्युः पञ्चविंशतिः ||४३||
मृतेऽण्ड एष एतस्मिन्यदभूत्ततो मार्तण्ड इति व्यपदेशः हिरण्यगर्भ इति यद्धिरण्याण्डसमुद्भवः ||४४||
सूर्येण हि विभज्यन्ते दिशः खं द्यौर्मही भिदा
स्वर्गापवर्गौ नरका रसौकांसि च सर्वशः ||४५||
देवतिर्यङ्मनुष्याणां सरीसृपसवीरुधाम्
सर्वजीवनिकायानां सूर्य आत्मा दृगीश्वरः ||४६||

राजन् ! स्वर्ग और पृथ्वीके बीचमें जो ब्रह्माण्डका केन्द्र है, वही सूर्यकी स्थिति है। सूर्य और ब्रह्माण्डगोलकके बीचमें सब ओरसे पचीस करोड़ योजनका अन्तर है ॥ ४३ ॥ सूर्य इस मृत अर्थात् मरे हुए (अचेतन) अण्ड में वैराजरूप से विराजते हैं, इसीसे इनका नाम ‘मार्तण्ड’ हुआ है। ये हिरण्मय (ज्योतिर्मय) ब्रह्माण्डसे प्रकट हुए हैं, इसलिये इन्हें ‘हिरण्यगर्भ’ भी कहते हैं ॥ ४४ ॥ सूर्यके द्वारा ही दिशा, आकाश, द्युलोक (अन्तरिक्षलोक), भूर्लोक, स्वर्ग और मोक्षके प्रदेश, नरक और रसातल तथा अन्य समस्त भागोंका विभाग होता है ॥ ४५ ॥ सूर्य ही देवता, तिर्यक्, मनुष्य, सरीसृप और लता-वृक्षादि समस्त जीवसमूहोंके आत्मा और नेत्रेन्द्रियके अधिष्ठाता हैं ॥ ४६ ॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां पञ्चमस्कन्धे भुवनकोशवर्णने समुद्र वर्षसन्निवेशपरिमाणलक्षणो विंशोऽध्यायः

शेष आगामी पोस्ट में --
गीताप्रेस,गोरखपुर द्वारा प्रकाशित श्रीमद्भागवतमहापुराण  (विशिष्टसंस्करण)  पुस्तककोड 1535 से


1 टिप्पणी:

  1. 💐🤍🌹ॐश्रीपरमात्मने नमः
    ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
    जय हो श्रीराधा रमण बिहारीजी

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