बुधवार, 31 जनवरी 2018

“मुकुंद माधव गोविन्द बोल | केशव माधव हरि हरि बोल || हरि हरि बोल हरि हरि बोल | कृष्ण कृष्ण बोल कृष्ण कृष्ण बोल ||”

“मुकुंद माधव गोविन्द बोल | केशव माधव हरि हरि बोल ||
हरि हरि बोल हरि हरि बोल | कृष्ण कृष्ण बोल कृष्ण कृष्ण बोल ||”

विवेकीजन सङ्ग या आसक्ति को ही आत्मा का अच्छेद्य बन्धन मानते हैं; किन्तु वही सङ्ग या आसक्ति जब संतों-महापुरुषों के प्रति हो जाती है, तो मोक्ष का खुला द्वार बन जाती है ॥ 
{प्रसङ्गमजरं पाशं आत्मनः कवयो विदुः ।
स एव साधुषु कृतो मोक्षद्वारं अपावृतम् ॥}
....श्रीमद्भागवत..३|२५|२३


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