मूकं करोति वाचालं पङ्गुं लङ्घयते गिरिं ।
यत्कृपा तमहं वन्दे परमानन्द माधवम् ॥
यत्कृपा तमहं वन्दे परमानन्द माधवम् ॥
(जिनकी कृपा से गूंगे बोलने लगते हैं, लंगड़े पहाड़ों को पार कर लेते हैं, उन परम आनंद स्वरूप श्रीमाधव की मैं वंदना करता हूँ)
इस ब्लॉग का ध्येय, सनातन धर्म एवं भारतीय संस्कृति का प्रसार करना तथा सन्तों के दुर्लभ प्रवचनों को जन-जन तक पहुंचाने का है | हम केवल धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों पर प्रामाणिक जानकारियों को ही प्रकाशित करते हैं। आत्मकल्याण तथा दुर्लभ-सत्संग हेतु हमसे जुड़ें और अपने सभी परिवारजनों और मित्रों को इसके लाभ की बात बताकर सबको जोड़ने का प्रयास करें | भगवान् में लगना और दूसरों को लगाना ‘परम-सेवा’ है | अतः इसका लाभ उठाना चाहिए |
॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ श्रीमद्भागवतमहापुराण षष्ठ स्कन्ध – ग्यारहवाँ अध्याय..(पोस्ट०५) वृत्रासुर की वीरवाणी और भगवत्प्राप्ति अन्येऽनु ये ...
Jai ho......Kripya puran sharnagati evam uski badhao paar bhi post daliye
जवाब देंहटाएं