कलिजुग सम जुग आन नहिं जौं नर कर बिस्वास।
(यदि मनुष्य विश्वास करे, तो कलियुग के समान दूसरा युग नहीं है। क्योंकि इस युग में श्रीरामजी के निर्मल गुणसमूहों को गा-गाकर मनुष्य बिना ही परिश्रम संसार रूपी समुद्र से तर जाता है )
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॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ श्रीमद्भागवतमहापुराण षष्ठ स्कन्ध – आठवाँ अध्याय..(पोस्ट०१) नारायणकवच का उपदेश श्रीराजोवाच यया गुप्तः सहस्राक्षः स...
राम राम श्री राम राम जय राम राम श्री राम
जवाब देंहटाएंजय श्री राम जय जय सियाराम
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