सोमवार, 3 अप्रैल 2023

श्रीराम जय राम जय जय राम !

“तुम्हरिहि कृपाँ तुम्हहि रघुनंदन । 
जानहिं भगत भगत उर चंदन॥“
 
( हे रघुनंदन ! हे भक्तों के हृदय को शीतल करनेवाले चंदन ! आपकी ही कृपा से भक्त आपको जान पाते हैं )


1 टिप्पणी:

  1. 🌸🍂🌷🌾जय श्री हरि: !!🙏🙏
    हरि कृपा ही केवलम
    जय जय सियाराम

    जवाब देंहटाएं

श्रीमद्भागवतमहापुराण पंचम स्कन्ध अठारहवां अध्याय..(पोस्ट०७)

॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ श्रीमद्भागवतमहापुराण  पंचम स्कन्ध – अठारहवाँ अध्याय..(पोस्ट०७) भिन्न-भिन्न वर्षोंका वर्णन हिरण्मयेऽपि भगवान्निवसति...