बुधवार, 12 जुलाई 2023

भगवत्‌-प्राप्ति क्यों नहीं होती ? (पोस्ट ०२)

||ॐ श्री परमात्मने नम:||


एक महापुरुष कहा करते, ‘मान लो, एक घर में चोर घुसा है, उसे यह पता लग गया है कि बगल के ही घर में सोने का ढेर है। बीच में एक पतली सी कमजोर दीवार है। इस अवस्था में चोर के मन की क्या स्थिति होगी? उसको न नींद आवेगी, न भूख लगेगी, वह सब कुछ भूल जायगा, उसे केवल एक ही बात का स्मरण रहेगा, कैसे दीवाल में सेंध लगाकर सोना निकाला जाय।’ क्या तुम कह सकते हो कि यदि मनुष्य को इस बात का यथार्थ विश्वास होता कि सम्पूर्ण आनन्द और महिमा की खान स्वयं भगवान्‌ यहां हैं, तब क्या उसका मन उसे छोड़कर तुच्छ सांसारिक कामों में लग सकता? जब मनुष्य को यह यथार्थ विश्‍वास हो जाता है कि ‘भगवान्‌’ हैं तभी उन्हें प्राप्त करने के लिये उसके मनमें प्रबल आकांक्षा उत्पन्न होकर उसको पागल बना देती है!
……….००३. १०. ज्येष्ठ कृष्ण ११ सं० १९८६. कल्याण (पृ० १०१४)


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