॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥
श्रीमद्भागवतमहापुराण
षष्ठ स्कन्ध – छठा अध्याय..(पोस्ट०३)
दक्षप्रजापति की साठ कन्याओं के वंश का विवरण
ध्रुवस्य भार्या धरणिरसूत विविधाः पुरः
अर्कस्य वासना भार्या पुत्रास्तर्षादयः स्मृताः ||१३||
अग्नेर्भार्या वसोर्धारा पुत्रा द्र विणकादयः
स्कन्दश्च कृत्तिकापुत्रो ये विशाखादयस्ततः ||१४||
दोषस्य शर्वरीपुत्रः शिशुमारो हरेः कला
वास्तोराङ्गिरसीपुत्रो विश्वकर्माकृतीपतिः ||१५||
ततो मनुश्चाक्षुषोऽभूद्विश्वे साध्या मनोः सुताः
विभावसोरसूतोषा व्युष्टं रोचिषमातपम् ||१६||
अर्ककी पत्नी वासनाके गर्भसे तर्ष (तृष्णा) आदि पुत्र हुए। अग्नि नामक वसुकी पत्नी धाराके गर्भसे द्रविणक आदि बहुत-से पुत्र उत्पन्न हुए ॥ १३ ॥ कृत्तिकापुत्र स्कन्द भी अग्नि से ही उत्पन्न हुए। उनसे विशाख आदिका जन्म हुआ। दोषकी पत्नी शर्वरीके गर्भसे शिशुमारका जन्म हुआ। वह भगवान्का कलावतार है ॥ १४ ॥ वसुकी पत्नी आङ्गिरसीसे शिल्पकलाके अधिपति विश्वकर्माजी हुए। विश्वकर्माके उनकी भार्या कृतीके गर्भसे चाक्षुष मनु हुए और उनके पुत्र विश्वेदेव एवं साध्यगण हुए ॥ १५ ॥ विभावसुकी पत्नी उषासे तीन पुत्र हुए—व्युष्ट, रोचिष् और आतप। उनमेंसे आतपके पञ्चयाम (दिवस) नामक पुत्र हुआ, उसीके कारण सब जीव अपने-अपने कार्योंमें लगे रहते हैं ॥ १६ ॥
शेष आगामी पोस्ट में --
🕉️ श्री परमात्मने नमः 🙏
जवाब देंहटाएंॐ नमो भगवते वासुदेवाय
कृष्ण दामोदरम् वासुदेवम् हरि: !!