॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥
श्रीमद्भागवतमहापुराण
पंचम स्कन्ध – उन्नीसवाँ अध्याय..(पोस्ट०४)
किम्पुरुष और भारतवर्षका वर्णन
तं भगवान्नारदो वर्णाश्रमवतीभिर्भारतीभिः प्रजाभिर्भगवत्प्रोक्ताभ्यां साङ्ख्ययोगाभ्यां भगवदनुभावोपवर्णनं सावर्णेरुपदेक्ष्यमाणः परम-भक्तिभावेनोपसरति इदं चाभिगृणाति ||१०||
ॐ नमो भगवते उपशमशीलायोपरतानात्म्याय नमोऽकिञ्चनवित्ताय ऋषिऋषभाय नरनारायणाय परमहंसपरमगुरवे आत्मारामाधिपतये नमो नम इति ||११||
गायति चेदम्
कर्तास्य सर्गादिषु यो न बध्यते
न हन्यते देहगतोऽपि दैहिकैः ||
द्रष्टुर्न दृग्यस्य गुणैर्विदूष्यते तस्मै
नमोऽसक्तविविक्तसाक्षिणे ||१२||
वहाँ भगवान् नारद जी स्वयं श्रीभगवान् के ही कहे हुए सांख्य और योगशास्त्र के सहित भगवन्महिमा को प्रकट करने वाले पाञ्चरात्रदर्शन का सावर्णि मुनि को उपदेश करने के लिये भारतवर्ष की वर्णाश्रमधर्मावलम्बिनी प्रजा के सहित अत्यन्त भक्तिभाव से भगवान् श्री नर-नारायण की उपासना करते और इस मन्त्र [*] का जप तथा स्तोत्र को गाकर उनकी स्तुति करते हैं ॥ १० ॥ —
‘ओङ्कारस्वरूप, अहंकारसे रहित, निर्धनोंके धन, शान्तस्वभाव ऋषिप्रवर भगवान् नर नारायण को नमस्कार है। वे परमहंसोंके परम गुरु और आत्मारामोंके अधीश्वर हैं, उन्हें बार-बार नमस्कार है” ११ ॥
यह गाते हैं—‘जो विश्व की उत्पत्ति आदि में उनके कर्ता होकर भी कर्तृत्व के अभिमान से नहीं बँधते, शरीर में रहते हुए भी उसके धर्म भूख-प्यास आदि के वशीभूत नहीं होते तथा द्रष्टा होनेपर भी जिनकी दृष्टि दृश्यके गुण-दोषोंसे दूषित नहीं होती—उन असङ्ग एवं विशुद्ध साक्षिस्वरूप भगवान् नर-नारायणको नमस्कार है ॥ १२ ॥
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[*] ॐ नमो भगवते उपशमशीलायोपरतानात्म्याय नमोऽकिञ्चनवित्ताय ऋषिऋषभाय नरनारायणाय परमहंसपरमगुरवे आत्मारामाधिपतये नमो नम इति।
शेष आगामी पोस्ट में --
🌹💟🥀जय श्रीहरि: !!🙏
जवाब देंहटाएंॐ नमो भगवते वासुदेवाय
हे नाथ नारायण वासुदेव: !!