॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥
श्रीमद्भागवतमहापुराण
षष्ठ स्कन्ध – छठा अध्याय..(पोस्ट०४)
दक्षप्रजापति की साठ कन्याओं के वंश का विवरण
पञ्चयामोऽथ भूतानि येन जाग्रति कर्मसु
सरूपासूत भूतस्य भार्या रुद्रांश्च कोटिशः ||१७||
रैवतोऽजो भवो भीमो वाम उग्रो वृषाकपिः
अजैकपादहिर्ब्रध्नो बहुरूपो महानिति ||१८||
रुद्रस्य पार्षदाश्चान्ये घोराः प्रेतविनायकाः
प्रजापतेरङ्गिरसः स्वधा पत्नी पितॄनथ ||१९||
अथर्वाङ्गिरसं वेदं पुत्रत्वे चाकरोत्सती
कृशाश्वोऽर्चिषि भार्यायां धूमकेतुमजीजनत् ||२०||
धिषणायां वेदशिरो देवलं वयुनं मनुम्
तार्क्ष्यस्य विनता कद्रूः पतङ्गी यामिनीति च ||२१||
पतङ्ग्यसूत पतगान्यामिनी शलभानथ
सुपर्णासूत गरुडं साक्षाद्यज्ञेशवाहनम्
सूर्यसूतमनूरुं च कद्रूर्नागाननेकशः ||२२||
भूतकी पत्नी दक्षनन्दिनी सरूपाने कोटि-कोटि रुद्रगण उत्पन्न किये। इनमें रैवत, अज, भव, भीम, वाम, उग्र, वृषाकपि, अजैकपाद, अहिर्बुध्न्य, बहुरूप, और महान्—ये ग्यारह मुख्य हैं। भूतकी दूसरी पत्नी भूतासे भयङ्कर भूत और विनायकादिका जन्म हुआ। ये सब ग्यारहवें प्रधान रुद्र महान्के पार्षद हुए ॥ १७-१८ ॥ अङ्गिरा प्रजापतिकी प्रथम पत्नी स्वधाने पितृगणको उत्पन्न किया और दूसरी पत्नी सतीने अथर्वाङ्गिरस नामक वेदको ही पुत्ररूपमें स्वीकार कर लिया ॥ १९ ॥ कृशाश्वकी पत्नी अर्चिसे धूम्रकेशका जन्म हुआ और धिषणासे चार पुत्र हुए—वेदशिरा, देवल, वयुन और मनु ॥ २० ॥ ताक्ष्1र्यनामधारी कश्यपकी चार स्त्रियाँ थीं—विनता, कद्रू, पतङ्गी और यामिनी। पतङ्गी से पक्षियों का और यामिनी से शलभों (पतंगों) का जन्म हुआ ॥ २१ ॥ विनता के पुत्र गरुड़ हुए, ये ही भगवान् विष्णु के वाहन हैं। विनता के ही दूसरे पुत्र अरुण हैं, जो भगवान् सूर्य के सारथि हैं। कद्रू से अनेकों नाग उत्पन्न हुए ॥ २२ ॥
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ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
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जय श्री राधे गोविंद 🙏🌺💐🌺