श्रीमद्गोस्वामी तुलसीदासजीकृत
वैराग्य- संदीपनी (Post 01)
निवेदन
प्रात:स्मरणीय गोस्वामी श्रीतुलसीदासजी महाराज का यह छोटा-सा ग्रन्थ 'वैराग्य-संदीपनी' है। इसमें कुल ६२ छन्द (दोहे - चौपाई - सोरठे) हैं। जिनमें तीन प्रकाश हैं। पहले
७ छन्दों में मंगलाचरण,
भगवान् श्रीराम की वन्दना, उनके स्वरूप का निरूपण और वैराग्य-संदीपनी' ग्रन्थ की प्रशंसा है। फिर २६ छन्दोंमें 'संत-स्वभाव-वर्णनरूप'
प्रथम प्रकाश है। दूसरा प्रकाश 'संत महिमा वर्णन' ९ छन्दों का और तीसरा 'शान्ति-वर्णन' २० छन्दों का है। ग्रन्थ बहुत छोटा होनेपर भी बड़ा ही उपादेय है। मेरा सबसे सादर
अनुरोध है कि वे श्रीगोस्वामीजीकी अनुभवयुक्त अमृतमयी वाणीका अध्ययन करके लाभ उठावें
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-- हनुमानप्रसाद पोद्दार
मकर-संक्रान्ति २००९
गोरखपुर
शेष
आगामी पोस्ट में --
गीताप्रेस,गोरखपुर द्वारा प्रकाशित श्रीमद्गोस्वामी तुलसीदासजीकृत
“वैराग्य संदीपनी ” पुस्तक कोड 114 से
