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मंगलवार, 29 सितंबर 2026

वैराग्य- संदीपनी (Post 01)

 

 



 ।।श्री हरि:।।

 

श्रीमद्गोस्वामी तुलसीदासजीकृत

 

वैराग्य- संदीपनी (Post 01)

 

निवेदन

 

प्रात:स्मरणीय गोस्वामी श्रीतुलसीदासजी महाराज का यह छोटा-सा ग्रन्थ 'वैराग्य-संदीपनी' है। इसमें कुल ६२ छन्द (दोहे - चौपाई - सोरठे) हैं। जिनमें तीन प्रकाश हैं। पहले ७ छन्दों में मंगलाचरण, भगवान् श्रीराम की वन्दना, उनके स्वरूप का निरूपण और वैराग्य-संदीपनी' ग्रन्थ की प्रशंसा है। फिर २६ छन्दोंमें 'संत-स्वभाव-वर्णनरूप' प्रथम प्रकाश है। दूसरा प्रकाश 'संत महिमा वर्णन' ९ छन्दों का और तीसरा 'शान्ति-वर्णन' २० छन्दों का है। ग्रन्थ बहुत छोटा होनेपर भी बड़ा ही उपादेय है। मेरा सबसे सादर अनुरोध है कि वे श्रीगोस्वामीजीकी अनुभवयुक्त अमृतमयी वाणीका अध्ययन करके लाभ उठावें ।

 

-- हनुमानप्रसाद पोद्दार

मकर-संक्रान्ति २००९

गोरखपुर

 

शेष आगामी पोस्ट में --

गीताप्रेस,गोरखपुर द्वारा प्रकाशित  श्रीमद्गोस्वामी तुलसीदासजीकृत

“वैराग्य संदीपनी ”  पुस्तक कोड 114 से

 

 

 



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