बुधवार, 29 अप्रैल 2026

श्रीमद्भागवतमहापुराण षष्ठ स्कन्ध - पंद्रहवाँ अध्याय..(पोस्ट०३)

॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥

श्रीमद्भागवतमहापुराण 
षष्ठ स्कन्ध – पंद्रहवाँ अध्याय..(पोस्ट०३)

चित्रकेतु को अङ्गिरा और नारदजी का उपदेश

श्रीराजोवाच - 

कौ युवां ज्ञानसम्पन्नौ महिष्ठौ च महीयसाम् । 
अवधूतेन वेषेण गूढौ इह समागतौ ॥ १० ॥
चरन्ति ह्यवनौ कामं ब्राह्मणा भगवत्प्रियाः । 
मादृशां ग्राम्यबुद्धीनां बोधायोन्मत्तलिङ्‌गिनः ॥ ११ ॥
कुमारो नारद ऋभुः अङ्‌गिरा देवलोऽसितः । 
अपान्तरतमो व्यासो मार्कण्डेयोऽथ गौतमः ॥ १२ ॥
वसिष्ठो भगवान् रामः कपिलो बादरायणिः । 
दुर्वासा याज्ञवल्क्यश्च जातुकर्णस्तथाऽऽरुणिः ॥ १३ ॥
रोमशश्च्यवनो दत्त आसुरिः सपतञ्जलिः । 
ऋषिर्वेदशिरा बोध्यो मुनिः पञ्चशिखस्तथा ॥ १४ ॥
हिरण्यनाभः कौसल्यः श्रुतदेव ऋतध्वजः । 
एते परे च सिद्धेशाः चरन्ति ज्ञानहेतवः ॥ १५ ॥
तस्माद् युवां ग्राम्यपशोः मम मूढधियः प्रभू । 
अन्धे तमसि मग्नस्य ज्ञानदीप उदीर्यताम् ॥ १६ ॥

राजा चित्रकेतु बोले—आप दोनों परम ज्ञानवान् और महान् से भी महान् जान पड़ते हैं तथा अपने को अवधूतवेष में छिपाकर यहाँ आये हैं। कृपा करके बतलाइये, आपलोग हैं कौन? ॥१०॥ मैं जानता हूँ कि बहुत-से भगवान्‌ के प्यारे ब्रह्मवेत्ता मेरे-जैसे विषयासक्त प्राणियोंको उपदेश करनेके लिये उन्मत्त का-सा वेष बनाकर पृथ्वीपर स्वच्छन्द विचरण करते हैं ॥ ११ ॥ सनत्कुमार, नारद, ऋभु, अङ्गिरा, देवल, असित, अपान्तरतम व्यास, मार्कण्डेय, गौतम, वसिष्ठ, भगवान्‌ परशुराम, कपिलदेव, शुकदेव, दुर्वासा, याज्ञवल्क्य, जातूकर्ण्य, आरुणि, रोमश, च्यवन, दत्तात्रेय, आसुरि, पतञ्जलि, वेदशिरा, बोध्यमुनि, पञ्चशिरा, हिरण्यनाभ, कौसल्य, श्रुतदेव और ऋतध्वज—ये सब तथा दूसरे सिद्धेश्वर ऋषि-मुनि ज्ञानदान करनेके लिये पृथ्वीपर विचरते रहते हैं ॥ १२—१५ ॥ स्वामियो ! मैं विषयभोगोंमें फँसा हुआ, मूढ़बुद्धि ग्राम्य पशु हूँ और अज्ञानके घोर अन्धकार में डूब रहा हूँ। आपलोग मुझे ज्ञानकी ज्योति से प्रकाशके केन्द्र में लाइये ॥ १६ ॥

शेष आगामी पोस्ट में --
गीताप्रेस,गोरखपुर द्वारा प्रकाशित श्रीमद्भागवतमहापुराण  (विशिष्टसंस्करण)  पुस्तककोड 1535 से


1 टिप्पणी:

  1. 🌹💟🥀जय श्रीहरि: !! 🙏
    नारायण नारायण नारायण नारायण
    कृष्ण दामोदरम् वासुदेवम् हरि: !!

    जवाब देंहटाएं

श्रीमद्भागवतमहापुराण षष्ठ स्कन्ध - सोलहवाँ अध्याय..(पोस्ट०६)

॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ श्रीमद्भागवतमहापुराण  षष्ठ स्कन्ध – सोलहवाँ अध्याय..(पोस्ट०६) चित्रकेतु का वैराग्य तथा सङ्कर्षणदेव के दर्शन यस्मिन...