रविवार, 24 मई 2026

श्रीमद्भागवतमहापुराण षष्ठ स्कन्ध - उन्नीसवाँ अध्याय..(पोस्ट०४)

॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥

श्रीमद्भागवतमहापुराण 
षष्ठ स्कन्ध – उन्नीसवाँ अध्याय..(पोस्ट०४)

पुंसवन-व्रतकी विधि

इत्यभिष्टूय वरदं श्रीनिवासं श्रिया सह । 
तन्निःसार्योपहरणं दत्त्वाऽऽचमनमर्चयेत् ॥ १५ ॥
ततः स्तुवीत स्तोत्रेण भक्तिप्रह्वेण चेतसा । 
यज्ञोच्छिष्टमवघ्राय पुनरभ्यर्चयेद् हरिम् ॥ १६ ॥
पतिं च परया भक्त्या महापुरुषचेतसा । 
प्रियैस्तैस्तैरुपनमेत् प्रेमशीलः स्वयं पतिः । 
बिभृयात् सर्वकर्माणि पत्‍न्या उच्चावचानि च ॥ १७ ॥ 
कृतमेकतरेणापि दम्पत्योरुभयोरपि । 
पत्‍न्यां कुर्यादनर्हायां पतिरेतत् समाहितः ॥ १८ ॥
विष्णोर्व्रतमिदं बिभ्रन् न विहन्यात् कथञ्चन । 
विप्रान् स्त्रियो वीरवतीः स्रग्गन्धबलिमण्डनैः । 
अर्चेदहरहर्भक्त्या देवं नियममास्थितः ॥ १९ ॥ 
उद्वास्य देवं स्वे धाम्नि तन्निवेदितमग्रतः । 
अद्यात् आत्मविशुद्ध्यर्थं सर्वकामर्द्धये तथा ॥ २० ॥

परीक्षित्‌ ! इस प्रकार परम वरदानी भगवान्‌ लक्ष्मीनारायणकी स्तुति करके वहाँसे नैवेद्य हटा दे और आचमन कराके पूजा करे ॥ १५ ॥ तदनन्तर भक्तिभावभरित हृदयसे भगवान्‌की स्तुति करे और यज्ञावशेषको सूँघकर फिर भगवान्‌की पूजा करे ॥ १६ ॥ भगवान्‌की पूजाके बाद अपने पतिको साक्षात् भगवान्‌ समझकर परम प्रेमसे उनकी प्रिय वस्तुएँ सेवामें उपस्थित करे। पतिका भी यह कर्तव्य है कि वह आन्तरिक प्रेमसे अपनी पत्नीके प्रिय पदार्थ ला-लाकर उसे दे और उसके छोटे-बड़े सब प्रकारके काम करता रहे ॥ १७ ॥ परीक्षित्‌ ! पति-पत्नीमेंसे एक भी कोई काम करता है, तो उसका फल दोनोंको होता है। इसलिये यदि पत्नी (रजोधर्म आदिके समय) यह व्रत करनेके अयोग्य हो जाय तो बड़ी एकाग्रता और सावधानीसे पतिको ही इसका अनुष्ठान करना चाहिये ॥ १८ ॥ यह भगवान्‌ विष्णुका व्रत है। इसका नियम लेकर बीचमें कभी नहीं छोडऩा चाहिये। जो भी यह नियम ग्रहण करे, वह प्रतिदिन माला, चन्दन, नैवेद्य और आभूषण आदिसे भक्तिपूर्वक ब्राह्मण और सुहागिनी स्त्रियोंका पूजन करे तथा भगवान्‌ विष्णुकी भी पूजा करे ॥ १९ ॥ इसके बाद भगवान्‌ को उनके धाम में पधरा दे, विसर्जन कर दे। तदनन्तर आत्मशुद्धि और समस्त अभिलाषाओं की पूर्ति के लिये पहले से ही उन्हें निवेदित किया हुआ प्रसाद ग्रहण करे ॥२०॥ 

शेष आगामी पोस्ट में --
गीताप्रेस,गोरखपुर द्वारा प्रकाशित श्रीमद्भागवतमहापुराण  (विशिष्टसंस्करण)  पुस्तककोड 1535 से


1 टिप्पणी:

  1. 🌹💟🥀जय श्री कृष्ण 🙏
    ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
    नारायण नारायण नारायण नारायण

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