शुक्रवार, 27 मार्च 2026

श्रीमद्भागवतमहापुराण षष्ठ स्कन्ध आठवाँ अध्याय..(पोस्ट०९)

॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥

श्रीमद्भागवतमहापुराण 
षष्ठ स्कन्ध – आठवाँ अध्याय..(पोस्ट०९)

नारायणकवच का उपदेश
त्वं यातुधानप्रमथप्रेतमातृ- 
पिशाचविप्रग्रहघोरदृष्टीन्
दरेन्द्र विद्रावय कृष्णपूरितो 
भीमस्वनोऽरेर्हृदयानि कम्पयन् ||२५||
त्वं तिग्मधारासिवरारिसैन्य-
मीशप्रयुक्तो मम छिन्धि छिन्धि
चक्षूंषि चर्मन्छतचन्द्र छादय 
द्विषामघोनां हर पापचक्षुषाम् ||२६||

शङ्खश्रेष्ठ ! आप भगवान्‌ श्रीकृष्णके फूँकनेसे भयङ्कर शब्द करके मेरे शत्रुओंका दिल दहला दीजिये एवं यातुधान, प्रमथ, प्रेत, मातृका, पिशाच तथा ब्रह्मराक्षस आदि भयावने प्राणियोंको यहाँसे झटपट भगा दीजिये ॥ २५ ॥ भगवान्‌ की प्यारी तलवार ! आपकी धार बहुत तीक्ष्ण है। आप भगवान्‌की प्रेरणा से मेरे शत्रुओं को छिन्न-भिन्न कर दीजिये। भगवान्‌ की प्यारी ढाल ! आप में सैकड़ों चन्द्राकार मण्डल हैं। आप पापदृष्टि पापात्मा शत्रुओं की आँखें बंद कर दीजिये और उन्हें सदा के लिये अन्धा बना दीजिये ॥ २६ ॥

शेष आगामी पोस्ट में --
गीताप्रेस,गोरखपुर द्वारा प्रकाशित श्रीमद्भागवतमहापुराण  (विशिष्टसंस्करण)  पुस्तककोड 1535 से


1 टिप्पणी:

  1. 🌹💖🥀जय हो चतुर्भुज नाथ🙏
    हे नाथ नारायण वासुदेव: !!
    ॐ नमो भगवते वासुदेवाय 🙏

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